सफ़र : कया अजीब नहीं है ये? (Road Trip: Hindi Poem)

If life is a journey, then we all are travelers. This journey is temporary, however, roads are permanent. Following Hindi poem, portraits how, thankfully, the journey is ironical in several ways!
क्या अजीब नहीं है ये,
की काले से लगते ये रास्ते,
ज़िन्दगी के कई रंग दिखा जाते है… ?

क्या अजीब नहीं है ये,
की पहिये पे चल रही गाडी,
मज़बूत पैरो को भी डगमगाती है… ?

क्या अजीब नहीं है ये,
की बिना जज़्बातों के ये  पथरीले रास्ते,
लोगो में जज़्बातों की जुबां बन जाती है… ?

क्या अजीब नहीं है ये,
की परस्पर हरिफाई में झोके गए इस दुनिया में,
दोस्ती हमेशा ही जीत जाती है… ?

क्या अजीब नहीं है ये,
की सफर में हमसफ़र मिल जाने से भी,
आज़ादी सही माइनो में बंधनो  में बंध कर मिलती है… 

क्या अजीब नहीं है ये,
की बिना रुके आगे बढ़ते बढ़ते सफर में,
हम असलियत में ठहराव और अनमोल पल कमा लेते है… ?

क्या अजीब नहीं है ये,
की हमेशा बहने वाली नदी स्वयं को साफ़ करती है,
और  तालाब   बेबस अस्वच्छ रहता है… ?

इन रास्तो के सफर में, जहा गाड़िया और मुसाफिर,
जज़्बातों से कई अधिक संवेदनाये लेके 
अपने अपने मुकाम ढूंढ रहे है,
ऐसी दुनिया मे…क्या अजीब  नहीं है ये...

क्या अजीब नहीं है ये.
जीवन क्षणभंगुर होने के बावजूद,
लोग सफर करते है…?

क्या अजीब नहीं है ये,
की लोग इस सफर के मुकाम से ज़्यादा,
सफर को ही मुकाम बना लेते है… ?

बेशक अजीब है… 
शायद इसीलिए ये ज़िन्दगी है…



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